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आसमान से आग बरसते देख लोग हुए हैरान;पहले  लगा फाइटर प्लेन है फिर अचानक से हो गए गायब

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आसमान से आग :राजस्थान के उदयपुर और बांसवाड़ा सहित देश के कई हिस्सों में 2 अप्रैल शनिवार शाम लगभग 7:45 बजे आसमान से कुछ गिरता हुआ दिखाई दे रहा था जो हूबहू आग का गोला सा लग रहा था। या मानो कि आसमान से तारा टूट कर गिरा हो। देश के कई हिस्सों में ऐसे नजारे देखने को मिले। जिन्हें कोई आग का गोला, तो कोई एस्ट्रॉयड, तो कोई सैटेलाइट का टुकड़ा बता रहा है हालांकि नासा ने 1 दिन पहले यानी 1 अप्रैल को पांच बड़े एस्ट्रॉयड यानी क्षुद्र ग्रह के पृथ्वी से गुजरने की भविष्यवाणी की थी।

आसमान से आग:उदयपुर के शेमारी कस्बे के लोगों के शनिवार 2 अप्रैल  शाम को होश उड़ गए जब उन्होंने देखा आसमान से कोई चमकीली वस्तू धरती की और गिर रही है पहले तो कस्बे के लोगों को लगा कि यह कोई फाइटर प्लेन है लेकिन धीरे-धीरे नजदीक आने पर यह चमकीले चीज तारों की तरह बिखर कर आंखों के सामने से गायब होने लगी। तथा बाद में उन्हें पता लगा कि यह तो उल्कापिंड है। गांव के लोगों ने इस दृश्य का वीडियो भी बनाया। सलूंबर विधायक अमृत लाल मीणा ने कहा कि पहले तो उन्हें भी लगा कोई फाइटर प्लेन गुजर रहा है लेकिन पास आने पर वह अलग-अलग होता प्रतीत हुआ तथा अंत में पता चला कि यह अल्का पिंड था।

शुरुआत में यह उल्कापिंड टूटते तारे की तरह प्रतीत हुआ था

आसमान से आग:शाम के समय राजस्थान के कई स्थानों पर लोगों को यह दृश्य दिखा जिसमें आसमान से आग बरसती दिखाई दे रही थी पहले तो लोगों ने इसे टूटता तारा समझा काफी देर तक यह ओझल नहीं हुआ लोगों में जानने की उत्सुकता जाग गई वहां के लोगों ने इस नजारे का वीडियो बनाया तथा फोटोस खींच कर कैमरे में कैद किया।

 

देशभर में अलग-अलग तरह से ज्यादा  दिखे नजारे

आसमान से आग के गोले गिरने के नजारे देश के अलग-अलग कोनों में अलग-अलग तरह से दिखाई दिए। राजस्थान और मध्य प्रदेश में गोला आसमान में काफी दूरी पर गिरता दिखाई दिया वहीं महाराष्ट्र के कुछ स्थानों पर आसमान से आग जमीन पर बिखरती दिखाई दी। वाकई में यह क्या था इसकी अभी तक कोई अधिकारीक पुष्टि नहीं की गई है कोई इसे तारा बता रहा है तो कोई आग का गोला।

जियोलॉजिस्ट ने किया दावा,कि ये  उल्कापिंड थे

जियोलॉजिस्ट और रिटायर्ड प्रोफेसर विनोद अग्रवाल ने बताया कि यह उल्कपात हुए था। जो छोटी-छोटी को उल्काए हैं जो पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश होते ही जल जाती है। हजारों लाखों में एक उल्का पिंड पृथ्वी पर पत्थर के रूप में गिरती है। तथा जब एक साथ छोटे-छोटे उल्का पिंड आते हैं तो उल्कापिंड की  बरसात होती है। जिनमें से अधिकतर तो आसमान में जल जाते हैं बड़ी उल्कापिंड को एस्ट्रॉयड कहते हैं। जो जमीन तक पहुंचती है लेकिन उसकी भी संभावना कम रहती है कि वह जमीन तक पहुंच पाएगी। राजस्थान के बांरा जिले के रामगढ़ के पास 70 करोड़ साल पहले एस्ट्रॉयड गिरा था जिससे वहां 4 किलोमीटर तक गड्ढा बन गया था।

18 से 40 मीटर तक बताया जा रहा है एस्ट्रॉयड का साइज

नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी की माने तो पृथ्वी से कुल 5 एस्ट्रॉयड गुजरने हैं इनका साइज 18 से 40 मीटर माना जा रहा है इस लैब का मानना है कि इन एस्ट्रोइड का साइज ज्यादा बड़ा नहीं है लेकिन यह एस्ट्रॉयड पृथ्वी से टकराते हैं तो काफी नुकसान देखने को मिलेगा। इन सभी एस्ट्रॉयड को नीयो यानी नियर अर्थ ऑब्जेक्ट कैटेगरी में रखा गया है। तथा इसके साथ ही यह भी माना जा रहा है तीन में से एक एस्ट्रॉइड अपने रास्ते से भटक गया है। और यह पृथ्वी के पश्चिमी हिस्से में ग्रीनलैंड से टकरा सकता है तथा भारी नुकसान भी हो सकता है।

 

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