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*बुखार एवं मुहं-हाथ-पैर-पेट पर छालो से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ी*

 

*बुखार एवं मुहं-हाथ-पैर-पेट पर छालो से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ी*

पीएमओ एवं वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ वीडी बाजिया ने बताया कि ईन दिनो ओपीडी में बच्चों में बुखार के साथ-साथ हाथ-पैरों, मुंह,कोहनी,पेट,कुल्हों पर पानी एवं मवाद से भरें छालो के केसेज आ रहे हैं। अधिकतर परिजन दो-तीन के बुखार के बाद मुंह में दर्दयुक्त पानी-मवाद के छालो के बारे बताते हैं। जो कि क्लिनिकली एचएमएफडी बिमारी का संकेत है।

वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ जितेन्द्र भाम्बू ने बताया कि सामान्यतः एचएमएफडी अर्थात हैंड-फुट-माऊथ-डिजीज  कोक्सेकी-ए-16 वैरिएंट वायरस के संक्रमण से होती है। एचएमएफडी में दर्दयुक्त पानी-मवाद मवाद के छाले एवं बुखार मुख्य विशेषताएं हैं । कभी कभार अन्य वैरिएंट यथा कोक्सैकी ए-6,इंटरोवायरस के संक्रमण से गंभीर तकलीफ़ भी हो जाती हैं।

*लक्षण*

-तेज/हल्का बुखार

-मुहं,हाथ,पैर,पेट,कुल्हों,कोहनी पर पानी-मवाद से भरे दर्दयुक्त छालों का होना

-भूख नहीं लगना

-खांसी,उल्टी होना आदि

*संक्रमण दर*

-एचएमएफडी अत्यधिक संक्रामक बिमारी है,तथा सम्पर्क में आए  50% अन्य बच्चों को संक्रमित कर सकता है।

-डायपर चेंजिंग संक्रमण को बढ़ाता है।

-तथा निरंतर हैंड वाशिंग संक्रमण को घटाता है।

-संक्रमित बच्चों के सम्पर्क में आने के बाद लगभग 3-6 दिन में बिमारी के लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

-संक्रमित बच्चा अन्य बच्चों को 21 दिन तक  संक्रमण फैला सकता है।

*गंभीरता*

-छालो का पूर्ण शरीर पर फैलाव एक्जिमा कोक्सैकियम कर सकता है।

-कौक्सैकी ए-6 वैरिएंट ज्यादा गंभीर बिमारी कर सकता है। जिसमें तेज बुखार,पूर्ण शरीर पर दर्दयुक्त छालो के साथ साथ  शरीर में पानी की अत्यधिक कमीं एवं हथेली-तलवों की चमड़ी उतरने लगती है।तथा नाखून कमजोर होने लगते हैं।

-एचएफएमडी गंभीर अवस्था में मायोकार्डाईटिस,एंक्फेलाईटिस,पेरीकार्डाईटिस आदि भी कर सकता है।

*बिमारी का डायग्नोसिस*

एचएफएमडी बिमारी की पहचान मुख्यतया क्लिनीकल ही रहती है जिसमें

-वर्षा ऋतु का मौसम

-एक ही परिवार/मौहल्ले में एक जैसे लक्षण वाले रोगी

-संक्रमित व्यक्ति से सम्पर्क की हिस्ट्री आदि इसका इशारा करते हैं।

-अन्य वायरस जनित बिमारियों की तरह एचएफएमडी को  आरटीपीसीआर जांच से कंफर्म किया जा सकता है।

*उपचार*

*वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ जितेन्द्र भाम्बू ने बताया कि सामान्यतः अधिकांश बच्चें लक्षणों के अनुसार उपचार करने पर स्वस्थ हो जाते हैं।   अल्प संख्या में बच्चें  गंभीर श्रैणी में जाते है। एचएमएफडी का एकबार का संक्रमण उस वैरिएंट के लिए पूर्णतया इम्यूनिटी प्रदान करता है।*

*उपचार के लिए  बुखार, डिहाईड्रेशन आदि का सही समय पर नियंत्रण आवश्यक है ताकि गंभीर अवस्था में जानें से रोका जा सके।*

-एचएफएमडी से  2-5% बच्चों को  ही भर्ती करने की आवश्यकता होती है। गंभीर अवस्था को प्लाज्मा थैरेपी या इम्नोग्लोब्यूलीन  से  नियंत्रित किया जा सकता है।

*बचाव*

-हैंड वॉशिंग

-साफ सफाई

-भीड़भाड से बचें

-काॅफ प्रोटोकॉल की पालना

-इंटेरोवायरस ए-71 वैक्सीन काफ़ी प्रभावी है।

-अत्यधिक गंभीर संक्रमण में

बिमारी का सही समय पर पता लगाना अत्यंत ही आवश्यक है। ताकि कम्यूनिटी स्तर पर संक्रमण को रोका को जा सके ।

-संक्रमित व्यक्ति को सही उपचार देना भी अति आवश्यक है।

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