झुंझुनूं में सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति, 24 नए भवनों के प्रस्ताव अब भी फाइलों में अटके
झुंझुनूं: जिले के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा के नाम पर जर्जर भवनों को तोड़ दिया गया, लेकिन नए स्कूल भवनों का निर्माण अब तक शुरू नहीं हो पाया है। करीब एक साल पहले शिक्षा विभाग ने जिले के 34 स्कूल भवनों को अत्यधिक जर्जर और खतरनाक घोषित किया था। इनमें से 30 स्कूल भवनों को गिरा दिया गया, लेकिन अधिकांश स्कूल आज भी अस्थायी भवनों में संचालित हो रहे हैं।
शिक्षा विभाग की धीमी कार्यप्रणाली के कारण हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई स्कूलों में बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र, सामुदायिक भवन, पुरानी मर्ज स्कूलों की इमारतों, हवेलियों और अस्थायी कमरों में पढ़ाई करनी पड़ रही है।
24 स्कूलों के नए भवनों को अब तक नहीं मिली प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति
जानकारी के अनुसार, नए भवनों के लिए 24 स्कूलों के प्रस्ताव तैयार किए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक उन्हें सरकार से प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल पाई है। इसी वजह से इन स्कूलों में निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
करीब एक वर्ष बीत जाने के बावजूद 30 स्कूलों में से केवल टीबा स्कूल का नया भवन तैयार हो पाया है, जबकि चार अन्य स्कूलों में निर्माण कार्य जारी है। शेष स्कूलों के प्रस्ताव अभी भी सरकारी फाइलों में लंबित हैं।
एक ही कमरे में चल रही कई कक्षाएं
अस्थायी भवनों में संचालित स्कूलों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। कई स्थानों पर दो-दो और तीन-तीन कक्षाओं के विद्यार्थियों को एक ही कमरे में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। इससे पढ़ाई का माहौल प्रभावित हो रहा है और शिक्षकों को भी पढ़ाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
स्कूलों में ब्लैकबोर्ड लगाने, शिक्षण सामग्री रखने और विद्यार्थियों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह तक उपलब्ध नहीं है।
एक हजार से अधिक विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित
इन अस्थायी भवनों में संचालित स्कूलों में एक हजार से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन है। पर्याप्त कक्षाओं और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में बच्चों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अभिभावकों में भी बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।
शिक्षा विभाग ने क्या कहा?
जिला शिक्षा अधिकारी अशोक शर्मा (सीडीईओ) का कहना है कि जर्जर भवनों को विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गिराया गया था। उन्होंने बताया कि अधिकांश स्कूलों के नए भवनों के प्रस्ताव तैयार हैं, लेकिन अभी तक सरकार से प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
अगले सत्र तक भी नए भवन मिलने की उम्मीद कम
यदि सरकार जल्द ही लंबित प्रस्तावों को मंजूरी दे भी देती है, तब भी निर्माण प्रक्रिया पूरी होने में समय लगेगा। ऐसे में इन स्कूलों के विद्यार्थियों को अगले शैक्षणिक सत्र तक भी नए भवन मिलने की संभावना बेहद कम दिखाई दे रही है।
Jhunjhunu Live Summary
- जिले के 34 स्कूल भवन जर्जर घोषित किए गए थे।
- इनमें से 30 भवन सुरक्षा कारणों से गिराए गए।
- केवल 1 स्कूल का नया भवन बनकर तैयार हुआ।
- 4 स्कूलों में निर्माण कार्य जारी है।
- 24 स्कूलों के प्रस्ताव प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं।
- 1,000 से अधिक विद्यार्थी आज भी अस्थायी भवनों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।



