झुंझुनूं: देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर झुंझुनूं शहर ने इतिहास रच दिया। पहली बार शहर में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा का आयोजन किया गया। इस्कॉन मंदिर की ओर से निकाली गई इस शोभायात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ 18 फीट ऊंचे आकर्षक लकड़ी के रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकले। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक रहा और जय श्री जगन्नाथ के जयकारों से शहर भक्तिमय हो उठा।
80 फीट लंबी रस्सी से भक्तों ने खींचा रथ
रथयात्रा की सबसे खास बात यह रही कि करीब 18 फीट ऊंचे पारंपरिक लकड़ी के रथ को लगभग 80 फीट लंबी रस्सी की मदद से हजारों श्रद्धालुओं ने स्वयं खींचा। भक्तों ने इसे भगवान की सेवा और सौभाग्य का अवसर मानते हुए पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। यात्रा के दौरान हरिनाम संकीर्तन, भजन और धार्मिक झांकियों ने माहौल को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया।
11 क्विंटल छप्पन भोग अर्पित, श्रद्धालुओं में बांटा गया महाप्रसाद
कार्यक्रम की शुरुआत इंदिरा नगर स्थित केशव आदर्श विद्या मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ की विशेष पूजा-अर्चना से हुई। भगवान को 11 क्विंटल छप्पन भोग अर्पित किया गया। दोपहर 3:48 बजे भव्य महाआरती संपन्न हुई, जिसके बाद शाम 4 बजे शंखनाद के साथ रथयात्रा का शुभारंभ किया गया।
पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं के बीच भगवान का महाप्रसाद वितरित किया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर धार्मिक आयोजन में अपनी आस्था प्रकट की।
इन प्रमुख मार्गों से निकली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा
भगवान जगन्नाथ की यह ऐतिहासिक रथयात्रा केशव आदर्श विद्या मंदिर से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी। यात्रा का मार्ग इस प्रकार रहा—
- केशव आदर्श विद्या मंदिर
- सुभाष मार्ग
- मंडावा मोड़
- रोडवेज बस स्टैंड
- शहीद कर्नल जेपी जानू स्कूल
- शाह मार्केट
- शाहों का कुआं
- गांधी चौक
रास्ते भर श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए भगवान के जयकारे लगाते रहे। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने पुष्पवर्षा कर रथयात्रा का स्वागत किया।
गांधी चौक में हुई भव्य महाआरती
रथयात्रा का समापन रात 8:45 बजे गांधी चौक में हुआ। यहां भगवान जगन्नाथ की भव्य महाआरती आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इसके बाद सभी भक्तों को साबूदाने की खिचड़ी का महाप्रसाद वितरित किया गया।
पहली बार के आयोजन ने बनाया यादगार माहौल
झुंझुनूं में पहली बार आयोजित हुई भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा ने शहरवासियों के लिए एक नई धार्मिक परंपरा की शुरुआत की। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी, भक्ति संगीत, धार्मिक झांकियां और अनुशासित आयोजन ने पूरे शहर को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। लोगों ने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में यह आयोजन और भी भव्य रूप में आयोजित किया जाएगा।



